March 5, 2024
flag of india : 'भारत' बनाम 'इंडिया'

‘भारत’ बनाम ‘इंडिया’ : नाम बदलने की लंबी और कठिन यात्रा

प्रिय पाठकों,

‘भारत’ बनाम ‘इंडिया’ : नाम बदलने की लंबी और कठिन यात्रा

भारत देश के नाम में बदलाव लाने की बहस फिर से शुरू हो गई है। कुछ लोगों का मानना है कि ‘इंडिया’ जैसा औपनिवेशिक नाम हटाकर ‘भारत’ जैसा स्वदेशी नाम रखा जाना चाहिए। भले ही ऐसा करने में भारी खर्च आए, पर यह हमारी सांस्कृतिक विरासत के लिए जरूरी कदम है। आइए हम इस विषय पर विस्तार से चर्चा करें।

‘इंडिया’ शब्द की उत्पत्ति ब्रिटिश शासनकाल में हुई थी। यह एक पराधीन राष्ट्र की पहचान देने वाला नाम था। लेकिन ‘भारत’ जैसा नाम हमारी संस्कृति और परंपरा से निकला हुआ है। यह हमारी आत्मा को छूता है।

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दुनिया के कई देशों ने अपना नाम बदला है। श्रीलंका ने सीलोन को त्यागकर अपने पुराने नाम को अपनाया। रोडेशिया ने जिम्बाब्वे बनकर अंग्रेजी शासन से मुक्ति पाई। इसी तरह, भारत भी अगर ‘इंडिया’ को ‘भारत’ में बदल दे तो यह एक ऐतिहासिक कदम होगा।

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लेकिन, एक देश का नाम बदलना आसान नहीं है। इसके कई नुकसान भी हैं। सबसे बड़ी समस्या इसमें लगने वाले भारी खर्च की है। सरकारी दस्तावेजों, पासपोर्ट, बैंक खातों आदि सभी जगह नया नाम अपडेट करना पड़ेगा।

आउटलुक इंडिया(Outlook India) की रिपोर्ट के अनुसार, नाम बदलने में अनुमानित खर्च 14 हजार 304 करोड़ रुपये आ सकता है और हम आपको बता दें की इस आंकड़े की गणना दक्षिण अफ्रीका के वकील डेरेन ऑलिवियर के सुझाए फॉर्मूला से की गई है।

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इसके अलावा, लोगों को नए नाम को स्वीकार करने में वक्त लगेगा। विदेशी कंपनियों के लिए भी यह एक बड़ा बदलाव होगा। इन सबके बावजूद, अगर ‘भारत’ नाम हमारी पहचान बन सकता है, तो इसके फायदे नुकसान से ज्यादा हैं।

‘India’ का नाम ‘Bharat’ किए जाने की बाते सामने आ रही हैं किन्तु इसे लेकर आधिकारिक तौर पर अभी कुछ नहीं कहा गया है लेकिन सियासी गलियारों में विरोध और समर्थन के सुर साफ़ सुनाई दे रहे हैं।

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निष्कर्ष में कहा जा सकता है कि देश का नाम बदलना एक लंबी और कठिन यात्रा है। इसके कई नुकसान होंगे पर फायदे भी कम नहीं हैं। आवश्यकता इस बात की है कि इस पर व्यापक जनमत संग्रह किया जाए और फिर निर्णय लिया जाए। यह निर्णय हम सबको मिलकर लेना है।

मैं आशा करता हूं कि मेरे विचार आपके लिए उपयोगी रहे होंगे। धन्यवाद।